IMP 2026 BORD EXAM| परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण | आचार्य रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल – जीवन परिचय
नाम : आचार्य रामचंद्र शुक्ल
जन्म : 1884 ई.
जन्म स्थान : बस्ती जिले के अगोना ग्राम
पिता : चन्द्रबली शुक्ल
शिक्षा : एफ.ए. (इन्टरमीडिएट)
आजीविका : अध्यापन, लेखन, प्राध्यापक
निधन : 1941 ई.
हिन्दी भाषा के उच्चकोटि के साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल निबन्धकार, समालोचक, इतिहासकार, अनुवादक एवं महान शैलीकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। गुलाबराय के अनुसार, उपन्यास साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचन्द का है, वही स्थान निबन्ध साहित्य में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म 1884 ई. में बस्ती जिले के अगोना नामक ग्राम में हुआ। इनके पिता का नाम चन्द्रबली शुक्ल था। इण्टरमीडिएट में आते ही इनकी पढ़ाई छूट गई। ये सरकारी नौकरी में गए, पर स्वाभिमान के कारण नौकरी छोड़कर मिर्ज़ापुर के मिशन स्कूल में चित्रकला अध्यापक बने।
इन्होंने हिन्दी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, फारसी आदि भाषाओं का ज्ञान स्वाध्याय से प्राप्त किया। बाद में काशी नागरी प्रचारिणी सभा से जुड़कर 'शब्द-सागर' के सहायक सम्पादक बने। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष का पद भी सुशोभित किया।
शुक्ल जी ने लेखन का प्रारम्भ कविता से किया। नाटक लेखन में भी रुचि रही, पर उनकी प्रतिभा निबन्ध लेखन एवं आलोचना में अधिक विकसित हुई। निबन्ध और आलोचना के क्षेत्र में उनका स्थान सर्वोपरि माना जाता है। साहित्य साधना करते हुए उनका निधन सन् 1941 ई. में हुआ।
मुख्य रचनाएँ
निबंध : चिंतामणि, विचार वीथी
आलोचना : रस मीमांसा, त्रिवेणी, सूरदास
हिंदी साहित्य का इतिहास
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