कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान ।। अध्याय 04 कृषि ।। प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि। गहन जीविका निर्वाह कृषि। वाणिज्यिक कृषि। रोपण कृषि।
कक्षा 10 – सामाजिक विज्ञान
अध्याय 04 : कृषि
🔊 Mukh Se samjhai Gai bhasha
भारतीय कृषि की विशेषताएँ एवं महत्व
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का स्थान सर्वोपरि है। यहाँ कृषि की प्रमुख विशेषताओं, महत्व और प्रकारों का पूर्ण विवरण दिया गया है।
🌾 भारतीय कृषि की विशेषताएँ
- ✅ भूमि चकबन्दी: बिखरी भूमि को एक स्थान पर इकट्ठा करना।
- ✅ जैविक खाद: जैविक खादों का अधिकाधिक उपयोग।
- ✅ आधुनिक यंत्र: नए उपकरणों से अधिक उत्पादन।
- ✅ फसल सुरक्षा: कीटनाशकों और फफूँदी नाशकों का प्रयोग।
- ✅ मिट्टी परीक्षण: लवणों तथा खनिजों का वैज्ञानिक परीक्षण।
- ✅ वैज्ञानिक विधि: वैज्ञानिक तरीके से खेतों की जुताई।
🔊 कृषि पाठ पढ़ें
कृषि के प्रकार
➤ (I) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि
➤ (II) गहन जीविका निर्वाह कृषि
➤ (III) वाणिज्यिक कृषि
➤ (IV) रोपण कृषि
💰 भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व
1. रोजगार का मुख्य साधन
2. राष्ट्रीय आय में योगदान
📘 मुँह से समझाई गई व्याख्या देखें / छिपाएँ
कर पा रहे। तो जिसको दिया उसको रोजगार मिला कि नहीं बताओ। ठीक।
अच्छा दूसरी चीज – राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान। भारतीय कृषि का आय में जो बहुत बड़ा योगदान है।
आपको बताना चाहेंगे क्योंकि देश की लगभग 1/3 भाग से अधिक राष्ट्रीय आय खेत के द्वारा ही प्राप्त होती है।
यानी देश में जितनी भी इनकम देश की होती है ना उसका 1/3 भाग तो केवल कृषि से होती है।
लोगों ने कपास पैदा किया, गेहूं पैदा किया, चावल पैदा किया। ये सब बुलेट पॉइंट है। नोट करना इनको। ठीक?
आगे बात समझ में आ रही है?
उसके बाद केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन है ना? केंद्रीय सांख्यिकीय जो संगठन है, उसके अनुमान के अनुसार राष्ट्रीय आय में कृषि का भाग लगभग 38% है।
यानी 38% जो है वो पैसा आता है भारत सरकार को मिल रहा है। वो कहां से? कृषि से मिल रहा है।
यहीं से प्रश्न बनेंगे। ठीक?
तो सर हम समझ गए कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या रोल है।
एक और रोल जरा ध्यान से देखो। टोटल छह रोल मैं बताऊंगा। ठीक?
अगला रोल देखो।
3. उद्योगों को कच्चा माल
कृषि क्षेत्र से औद्योगिक जगत को कच्चा माल प्राप्त होता है। यदि कृषि से उत्पन्न कच्चे माल का अभाव हो जाता है तो ऐसे उद्योग बन्द होने की कगार पर खड़े हो जाते हैं।
📘 मुँह से समझाई गई व्याख्या देखें / छिपाएँ
उद्योगों को कच्चा माल। उद्योगों को कच्चा माल। अब जैसे फॉर एग्जांपल समझना मेरी कोई ब्रेड की फैक्ट्री है तो क्या ब्रेड की फैक्ट्री में मिट्टी से मैं ब्रेड बनाऊंगा क्या?
नहीं ना? कैसे बनाऊंगा मैं? मुझे क्या चाहिए? मुझे गेहूं चाहिए कि नहीं चाहिए? मुझे चावल चाहिए कि नहीं चाहिए?
तो भैया उद्योगों को कच्चा माल मिलेगा।
अब फॉर एग्जांपल मेरे पास मैं कपड़े की फैक्ट्री चलाता हूं। तो अगर मैं कपड़े की फैक्ट्री चला रहा हूं तो मुझे कपास चाहिए कि नहीं चाहिए? जूट चाहिए कि नहीं चाहिए?
चाहिए कि नहीं चाहिए? बताओ।
मेरी एक बहुत बड़ी फैक्ट्री है। मैं रस्सी बनाता हूं। किसकी रस्सी बनाता हूं? जो नारियल वाली आती है ना वह बनाता हूं।
तो भाई मुझे नारियल चाहिए कि नहीं सूखा?
यानी सर हम बहुत अच्छे से समझ गए कि उद्योगों को कच्चा माल।
मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा केवल इन हेडिंगों को पढ़ो। केवल इन हेडिंगों पे ध्यान दो।
मैं नीचे जो लिख के लाया हूं इसको स्क्रीनशॉट भले ले लो लेकिन इसको केवल हेडिंग पे ध्यान दो
कि रोजगार का मुख्य साधन, राष्ट्रीय आय में योगदान, उद्योगों को कच्चा माल।
और जो मैं मुंह से बोल रहा हूं उसको समझने का प्रयास करो।
ठीक? अक्सर आप लोग बोलते हो ना सर सोशल साइंस याद नहीं होती।
मैं आपको सच बताऊं सोशल साइंस याद करने का सब्जेक्ट ही नहीं है।
आप कभी रामायण देखे हो? आपने कभी रामायण देखा है?
तो कभी आपने यह सोचा कि भाई मैं उसको याद करूं? नहीं ना।
आपको सबको पता है कि शूर्पणखा की नाक लक्ष्मण ने काटी थी। क्यों काटी थी? यह भी पता है।
राम जी 14 वर्ष के लिए जंगल गए थे। मतलब वनवास हुआ था उनको।
कैसे पता है? आपने कहानी सुनी। आपने रामायण देखी।
बिल्कुल वैसे ही हमारी सोशल साइंस होती है। इसमें आपको समझना है चीजों को।
फिर आप बना के लिखोगे। इससे आपका माइंड बूस्ट होता है।
तो आपको चीजें पेपर के टाइम याद आएंगी। रट्टा मार के बैठना कभी भी पॉसिबल नहीं है।
इसलिए समझने का प्रयास करो, सुनने का प्रयास करो। बेहतर समझ में आएगा।
तो हमने कहा उद्योगों को कच्चा माल। कृषि क्षेत्र में औद्योगिक जगत को कच्चा माल प्राप्त होता है।
अच्छा यदि कृषि से उत्पन्न कच्चे माल का अभाव हो जाता है तो ऐसे उद्योग बंद होने की कगार पे आ जाते हैं।
यानी लोग अगर कपास पैदा करना बंद कर दें तो कच्चा माल नहीं मिलेगा।
कपड़े नहीं बन पाएंगे।
तो एक यह टॉपिक हो गया।
अब हमारे पास अगला आता।
4. खाद्यान्न की पूर्ति
देश की विशाल जनसंख्या को खाद्यान्न उत्पादित करके पेट भरने की व्यवस्था हमारी कृषि ही करती है
📘 मुँह से समझाई गई व्याख्या देखें / छिपाएँ
कि खदान की पूर्ति। यानी जब कृषि होगी तभी तो खाने-पीने वाली चीज़ें होंगी।
तो इससे पेट भरेगा कि नहीं बताओ? यानी कि सर समझ गए कि खदान की भी पूर्ति होती है।
खाने-पीने वाली चीजें लोगों को मिलती हैं। अगर कृषि नहीं होगी तो खदान पेट कैसे भरेगा?
बताओ। अभी सोचो एक बार। इमेजिन करो।
कोई ना खेती करना नहीं चाहता। सबको चाहिए ना जॉब।
कोई खेती करना चाहता है? नहीं।
किसी से पूछो क्या करना चाहते हो? तो उसके मुंह से जॉब निकलेगी।
आईएएस, पीसीएस बनना चाहता हूं।
कभी कोई खेती करना चाहता है?
सरदार के बच्चे करना चाहते होंगे क्योंकि उनके पास साधन होते हैं।
उनको पता है कि खेती में क्या हो सकता है।
लेकिन वास्तव में किसी पूछो नहीं।
लेकिन क्या खेती नहीं होगी तो पेट भरेगा?
कैसे भरेगा भाई? भरेगा ही नहीं।
अगर खेती नहीं होगी।
इसका मतलब सर समझ गए कि देश की विशाल जनसंख्या को जो खदान मिलता है, खाने-पीने वाली चीजें मिलती हैं,
पेट भरने की व्यवस्था हमारी कृषि ही करती है।
तो खदान की भी पूर्ति कौन करता है?
कृषि ही करती है।
आगे चलेंगे।
विदेशी व्यापार में महत्व।
आप लोग बहुत अच्छे से इस बात को जानते हो कि एक
5. विदेशी व्यापार
भारत के विदेशी व्यापार में कृषि उत्पादनों का एक महत्वपूर्ण स्थान है। कृषि से उत्पन्न उत्पादों को विदेश में निर्यात किया जाता है। इस प्रकार भारतीय कृषि विदेशी मुद्रा अर्जन का मुख्य स्रोत हैंविदेशी व्यापार।
📘 मुँह से समझाई गई व्याख्या देखें / छिपाएँ
विदेशी व्यापार में महत्व। आप लोग बहुत अच्छे से इस बात को जानते हो कि एक लंबे समय से भारत चाय का निर्यातक रहा है।
भारत चाय को एक देश अपने देश से दूसरे देश में भेजता है। बहुत अच्छे से जानते हो।
चाय का सबसे ज्यादा उत्पादन कहां होता है? असम में होता है।
आप यह बात भी बहुत अच्छे से जानते हो कि भारत से कपास इंग्लैंड यानी कि ब्रिटेन भेजा जाता था।
बहुत अच्छे से जानते हो।
भारत में आप जानते हो कि टमाटर पहले पाकिस्तान को भेजा जाता था।
इसीलिए वहां ज्यादातर लोग लालाल हैं। सॉरी। ठीक है।
तो सर समझ गए प्याज भारत से दूसरे देशों को भेजा जाता है।
तो सर विदेशी व्यापार में भी क्या होता है? महत्व होता है।
अब आप सोचोगे सर क्यों भेजा जाता है?
तो अगर किसी भी देश में किसी चीज की अधिकता है
जैसे भारत क्या करता है? पेट्रोलियम दूसरे देशों से लेता है ना।
नहीं तो अगर भारत दूसरे देशों से पेट्रोलियम ना ले यानी कि डीजल, पेट्रोल ये सब चीजें ना ले
तो भारत में पेट्रोल बहुत महंगा हो जाएगा। है ना?
क्योंकि भारत में तो सुविधा ही नहीं है पेट्रोल की।
तो सर हम इस बात को समझ गए कि विदेशी व्यापार में भी क्या होता है? महत्व होता है।
सर इन पॉइंट्स को नोट करिएगा।
तो भारत के विदेशी व्यापार में कृषि उत्पादनों का एक महत्वपूर्ण स्थान है।
कृषि से उत्पन्न उत्पादों को विदेश में निर्यात किया जाता है।
निर्यात का मतलब सर क्या होता है? बेचना। ठीक?
इस प्रकार भारतीय कृषि विदेशी मुद्रा अर्जन का मुख्य स्रोत है।
यानी विदेशी मुद्रा।
अब फॉर एग्जांपल समझना भारत में प्याज ₹70 किलो इतना महंगा हो जाता है कभी-कभी।
अब पता चला वही प्याज कहां पहुंचा? अमेरिका पहुंचा।
अमेरिका में प्याज इतना ज्यादा नहीं हो रहा है।
अमेरिका वालों ने कहा $2 दे दिया।
अब $1 इस समय ₹88 का है।
अब उनको पता चला 90 × 2 = 180, लगभग ₹176 मिल गए।
अब सोचो वही चीज ₹70 में भारत में बिक रही थी।
अब वहां ₹176 मिल गए।
तो फायदा हुआ कि नहीं बताओ?
तो इस तरीके से क्या होता है? विदेशी व्यापार में महत्व होता है।
आगे बात करेंगे मेरे प्यारे बच्चे।
6. राजस्व महत्वपूर्ण योगदान
सरकार के राजस्व में कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण स्थान है। क्योंकि केवल मालगुजारी से राज्य सरकारों को ₹350 करोड़ की वार्षिक आय प्राप्त होती है। इसी प्रकार कृषि आय कर से लगभग 70 करोड़ की वार्षिक आय है।
📘 मुँह से समझाई गई व्याख्या देखें / छिपाएँ
राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान। राजस्व का मतलब क्या
कौन करता है? कृषि ही करती है।
आगे चलेंगे।
विदेशी व्यापार में महत्व। आप लोग बहुत अच्छे से इस बात को जानते हो कि एक लंबे समय से एक लंबे समय से भारत चाय का निर्यातक रहा है।
भारत चाय को एक देश अपने देश से दूसरे देश में भेजता है। बहुत अच्छे से जानते हो।
चाय का सबसे ज्यादा उत्पादन कहां होता है? असम में होता है।
आप यह बात भी बहुत अच्छे से जानते हो कि भारत से कपास इंग्लैंड यानी कि ब्रिटेन भेजा जाता था। बहुत अच्छे से जानते हो।
भारत में आप जानते हो कि टमाटर पहले पाकिस्तान को भेजा जाता था।
इसीलिए वहां ज्यादातर लोग लालाल हैं। सॉरी। ठीक है।
तो सर समझ गए प्याज भारत से दूसरे देशों को भेजा जाता है।
तो सर विदेशी व्यापार में भी क्या होता है? महत्व होता है।
अब आप सोचोगे सर क्यों भेजा जाता है?
तो अगर किसी भी देश में किसी चीज की अधिकता है
जैसे भारत क्या करता है? पेट्रोलियम दूसरे देशों से लेता है ना।
नहीं तो अगर भारत दूसरे देशों से पेट्रोलियम ना ले यानी कि डीजल, पेट्रोल ये सब चीजें ना ले
तो भारत में पेट्रोल बहुत महंगा हो जाएगा। है ना?
क्योंकि भारत में तो सुविधा ही नहीं है पेट्रोल की।
तो सर हम इस बात को समझ गए कि विदेशी व्यापार में भी क्या होता है? महत्व होता है।
सर इन पॉइंट्स को नोट करिएगा।
तो भारत के विदेशी व्यापार में कृषि उत्पादनों का एक महत्वपूर्ण स्थान है।
कृषि से उत्पन्न उत्पादों को विदेश में निर्यात किया जाता है।
निर्यात का मतलब सर क्या होता है? बेचना। ठीक?
इस प्रकार भारतीय कृषि विदेशी मुद्रा का अर्जन का मुख्य स्रोत है।
यानी विदेशी मुद्रा।
अब फॉर एग्जांपल समझना भारत में प्याज ₹70 किलो इतना महंगा हो जाता है कभी-कभी।
अब पता चला वही प्याज कहां पहुंचा? अमेरिका पहुंचा।
अमेरिका में प्याज इतना ज्यादा नहीं हो रहा है।
अमेरिका वालों ने कहा $2 दे दिया।
अब $1 इस समय ₹88 का है।
अब उनको पता चला कि 90 × 2 = 180, लगभग ₹176 मिल गए।
अब सोचो वही चीज़ ₹70 में भारत में बिक रही थी।
अब वहां ₹176 मिल गए।
तो फायदा हुआ कि नहीं बताओ?
तो इस तरीके से क्या होता है? विदेशी व्यापार में महत्व होता है।
आगे बात करेंगे मेरे प्यारे बच्चे।
राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान। राजस्व का मतलब क्या।
👀 एक नज़र में – परीक्षा हेतु 6 महत्वपूर्ण बिंदु
- रोजगार का मुख्य साधन – कृषि से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है।
- राष्ट्रीय आय में योगदान – राष्ट्रीय आय का बड़ा भाग कृषि से प्राप्त होता है।
- उद्योगों को कच्चा माल – कपास, जूट, गन्ना, गेहूं आदि कृषि से उद्योगों को मिलते हैं।
- खाद्यान्न की पूर्ति – देश की विशाल जनसंख्या का पेट कृषि से भरता है।
- विदेशी व्यापार में महत्व – कृषि उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
- राजस्व में योगदान – कृषि सरकार के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
📌 इन 6 बिंदुओं से परीक्षा में सीधे 6 नंबर पक्के।
⚠️ कृषि की प्रमुख समस्याएँ
| सामान्य कारण | संस्थागत कारण |
|---|---|
| ▪︎ भूमि पर निरंतर कृषि ▪︎ भूमि पर जनसंख्या का अत्यधिक भार ▪︎ कुशल मानव-शक्ति की कमी |
▪︎ कृषि सेवाओं की कमी ▪︎ खेतों के छोटे आकार ▪︎ अल्प-मात्रा में भूमि सुधार |
🌱 कृषि के प्रकार
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| प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि |
1. प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि: इस तरह की खेती जमीन के छोटे टुकड़ों पर होती है। इस तरह की खेती में आदिम औजार और परिवार या समुदाय के श्रम का इस्तेमाल किया जाता है। यह खेती मुख्य रूप से मानसून पर और जमीन की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर करती है। किसी विशेष स्थान की जलवायु को देखते हुए ही किसी फसल का चुनाव किया जाता है।
इसे 'कर्तन दहन खेती' भी कहते हैं। इसके लिए जमीन के किसी टुकड़े की वनस्पति को पहले काटा जाता है और फिर उन्हें जला दिया जाता है। उससे मिलने वाली राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है और फिर उस पर फसल उगाई जाती है।
| नाम | क्षेत्र |
|---|---|
| झूम | असम, मेघालय, मिजोरम |
| पामलू | मणिपुर |
| दीपा | अंडमान निकोबार |
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| 2. गहन जीविका निर्वाह कृषि |
2. गहन जीविका निर्वाह कृषि: इस तरह की खेती सघन आबादी वाले क्षेत्रों में होती है। इस खेती में जैव रासायनिक निवेशों और सिंचाई का अत्यधिक इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार की खेती पर जनसंख्या का भारी दबाव रहता है।
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| 3.वाणिज्यिक कृषि |
3. वाणिज्यिक कृषि: इस तरह की खेती सघन आबादी वाले क्षेत्रों में होती है। इस खेती में जैव रासायनिक निवेशों और सिंचाई का अत्यधिक इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार की खेती पर जनसंख्या का भारी दबाव रहता है।
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| 4. रोपण कृषि |
4. रोपण कृषि: इस प्रकार की खेती में, किसी एक फसल को एक बड़े क्षेत्र में उपजाया जाता है। रोपण कृषि में बड़ी पूंजी और बहुत सारे कामगारों की आवश्यकता होती है। चाय, कॉफी, रबर, गन्ना, केला, आदि रोपण कृषि के महत्वपूर्ण फसल हैं। चाय का उत्पादन मुख्य रूप से असम और उत्तरी बंगाल के चाय बागानों में होता है।





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